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mahabharat 3.64.48: ‘निषद्देश के राजा मेरे ससुर थे, वे प्रातःकाल के प्रेमी मनुष्य वीरसेन के नाम से प्रसिद्ध थे ॥48॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.64.48 
निषधेषु महाराज: श्वशुरो मे नरोत्तम:।
गृहीतनामा विख्यातो वीरसेन इति स्म ह॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
‘निषद्देश के राजा मेरे ससुर थे, वे प्रातःकाल के प्रेमी मनुष्य वीरसेन के नाम से प्रसिद्ध थे ॥48॥
 
'The king of Nishaddesh was my father-in-law, he was famous by the name of Veersen, the morning-loving human being. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)