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mahabharat 3.64.43: 'मैं आपके पास आकर आपके चरणों में प्रणाम करती हूँ। आप मेरा परिचय इस प्रकार दें, मैं राजा की पुत्री, राजा की पुत्रवधू और राजा की पत्नी हूँ। मैं 'दमयंती' नाम से प्रसिद्ध हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.64.43 
प्र्रणमाम्यभिगम्याहं राजपुत्रीं निबोध माम्।
राज्ञ: स्नुषां राजभार्यां दमयन्तीति विश्रुताम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
'मैं आपके पास आकर आपके चरणों में प्रणाम करती हूँ। आप मेरा परिचय इस प्रकार दें, मैं राजा की पुत्री, राजा की पुत्रवधू और राजा की पत्नी हूँ। मैं 'दमयंती' नाम से प्रसिद्ध हूँ।'
 
'I come near and bow down to your feet. You should introduce myself in this way, I am the daughter of the king, daughter-in-law of the king and wife of the king. I am famous by the name 'Damayanti'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)