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mahabharat 3.64.40: वह पर्वत पलाश, अशोक, बकुल, पुन्नाग, कनेर, धव और प्लक्ष आदि सुन्दर फूलों वाले वृक्षों से सुशोभित हो रहा है॥40॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.64.40 
किंशुकाशोकबकुलपुन्नागैरुपशोभितम्।
कर्णिकारधवप्लक्षै: सुपुष्पैरुपशोभितम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वह पर्वत पलाश, अशोक, बकुल, पुन्नाग, कनेर, धव और प्लक्ष आदि सुन्दर फूलों वाले वृक्षों से सुशोभित हो रहा है॥40॥
 
That mountain is being adorned with beautiful flowering trees like Palash, Ashoka, Bakul, Punnag, Kaner, Dhav and Plaksh etc. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)