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mahabharat 3.64.37: अच्छा, मैं इस पवित्र पर्वत से पूछूँगा। यह अनेक ऊँची, सुन्दर, बहुरंगी और मनोरम चोटियों से सुशोभित है। 37.   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.64.37 
इमं शिलोच्चयं पुण्यं शृङ्गैर्बहुभिरुच्छ्रितै:।
विराजद्भिरिवानेकैर्नैकवर्णैर्मनोरमै:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
अच्छा, मैं इस पवित्र पर्वत से पूछूँगा। यह अनेक ऊँची, सुन्दर, बहुरंगी और मनोरम चोटियों से सुशोभित है। 37.
 
Well, I will ask this sacred mountain. It is adorned with many tall, beautiful, multi-coloured and picturesque peaks. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)