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mahabharat 3.64.31-32: जंगल का वह राजा, तेजस्वी सिंह, मेरी ओर आ रहा है। उसके चार दाँत और बड़ी ठुड्डी है। मैं बिना किसी भय के उसकी ओर जा रहा हूँ और कह रहा हूँ, 'आप हिरणों के राजा और इस जंगल के स्वामी हैं।'   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  3.64.31-32 
अरण्यराडयं श्रीमांश्चतुर्दंष्ट्रो महाहनु:॥ ३१॥
शार्दूलोऽभिमुखोऽभ्येति व्रजाम्येनमशङ्किता।
भवान् मृगाणामधिपस्त्वमस्मिन् कानने प्रभु:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जंगल का वह राजा, तेजस्वी सिंह, मेरी ओर आ रहा है। उसके चार दाँत और बड़ी ठुड्डी है। मैं बिना किसी भय के उसकी ओर जा रहा हूँ और कह रहा हूँ, 'आप हिरणों के राजा और इस जंगल के स्वामी हैं।'
 
That king of the forest, the radiant lion, is coming towards me. He has four teeth and a huge chin. I am going towards him without any fear and saying, 'You are the king of deers and the master of this forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)