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श्लोक 3.64.29  |
कच्चिद् दृष्टस्त्वयारण्ये संगत्येह नलो नृप:।
को नु मे वाथ प्रष्टव्यो वनेऽस्मिन् प्रस्थितं नलम्॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| ‘क्या तुम इस वन में राजा नल से मिले हो और उन्हें देखा है?’ इस वन में जाने वाले नल के विषय में ऐसा प्रश्न मैं किससे पूछूँ?॥29॥ |
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| 'Have you met King Nala in this forest and seen him?' To whom should I ask such a question about Nala who is going to this forest?॥ 29॥ |
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