श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.64.29 
कच्चिद् दृष्टस्त्वयारण्ये संगत्येह नलो नृप:।
को नु मे वाथ प्रष्टव्यो वनेऽस्मिन् प्रस्थितं नलम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
‘क्या तुम इस वन में राजा नल से मिले हो और उन्हें देखा है?’ इस वन में जाने वाले नल के विषय में ऐसा प्रश्न मैं किससे पूछूँ?॥29॥
 
'Have you met King Nala in this forest and seen him?' To whom should I ask such a question about Nala who is going to this forest?॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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