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mahabharat 3.64.27: हे निषधनराज! इस अत्यन्त भयंकर वन में, जहाँ सिंह और व्याघ्र रहते हैं, क्या आप सो रहे हैं, बैठे हैं या खड़े हैं?॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.64.27 
वने चास्मिन् महाघोरे सिंहव्याघ्रनिषेविते।
शयानमुपविष्टं वा स्थितं वा निषधाधिप॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे निषधनराज! इस अत्यन्त भयंकर वन में, जहाँ सिंह और व्याघ्र रहते हैं, क्या आप सो रहे हैं, बैठे हैं या खड़े हैं?॥ 27॥
 
O King of Nishadhan! In this extremely fearsome forest, where lions and tigers live, are you sleeping, sitting or standing?॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)