Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.64.25: महाराज! मैं सती दमयन्ती इस महान् वन में अकेली आपको पुकार रही हूँ, फिर आप मुझे उत्तर क्यों नहीं दे रहे हैं?॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.64.25 
महाराज महारण्ये अहमेकाकिनी सती।
दमयन्त्यभिभाषे त्वां किं मां न प्रतिभाषसे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मैं सती दमयन्ती इस महान् वन में अकेली आपको पुकार रही हूँ, फिर आप मुझे उत्तर क्यों नहीं दे रहे हैं?॥ 25॥
 
Maharaj! I, Sati Damayanti, am alone in this great forest calling you, why are you not answering me?॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)