Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.64.22: महाराज! मैं आपकी प्रिय पत्नी हूँ और आप मेरे प्रिय पति हैं, फिर भी जब मैं यहाँ विक्षिप्त होकर विलाप कर रही हूँ, तब आप मेरे प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं दे रहे हैं?॥22॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.64.22 
उन्मत्तां विलपन्तीं मां भार्यामिष्टां नराधिप।
ईप्सितामीप्सितोऽसि त्वं किं मां न प्रतिभाषसे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मैं आपकी प्रिय पत्नी हूँ और आप मेरे प्रिय पति हैं, फिर भी जब मैं यहाँ विक्षिप्त होकर विलाप कर रही हूँ, तब आप मेरे प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं दे रहे हैं?॥22॥
 
Maharaj! I am your beloved wife and you are my beloved husband, even in such a condition, when I am here wailing madly, why are you not answering my question? ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)