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mahabharat 3.64.2: वह वन सिंह, चीते, मृग, व्याघ्र, भैंसे और भालू आदि पशुओं से भरा हुआ था और नाना प्रकार के पक्षी भी थे। वहाँ म्लेच्छ और तस्कर रहते थे॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.64.2 
सिंहद्वीपिरुरुव्याघ्रमहिषर्क्षगणैर्युतम्।
नानापक्षिगणाकीर्णं म्लेच्छतस्करसेवितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वह वन सिंह, चीते, मृग, व्याघ्र, भैंसे और भालू आदि पशुओं से भरा हुआ था और नाना प्रकार के पक्षी भी थे। वहाँ म्लेच्छ और तस्कर रहते थे॥2॥
 
That forest was full of animals like lions, leopards, deer, tigers, buffaloes and bears and also had various bird species. Mlecchas and smugglers lived there.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)