श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.64.19 
हा वीर नल नामाहं नष्टा किल तवानघ।
अस्यामटव्यां घोरायां किं मां न प्रतिभाषसे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे वीर और भोले नल! मैं तुम्हारी दमयन्ती इस घोर वन में मर रही हूँ, फिर तुम मेरे प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं दे रहे हो?॥19॥
 
Oh, brave and innocent Nala! I, your Damayanti, am perishing in this dreadful forest, why are you not answering my question?॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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