vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट
»
श्लोक 19
श्लोक
3.64.19
हा वीर नल नामाहं नष्टा किल तवानघ।
अस्यामटव्यां घोरायां किं मां न प्रतिभाषसे॥ १९॥
अनुवाद
हे वीर और भोले नल! मैं तुम्हारी दमयन्ती इस घोर वन में मर रही हूँ, फिर तुम मेरे प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं दे रहे हो?॥19॥
Oh, brave and innocent Nala! I, your Damayanti, am perishing in this dreadful forest, why are you not answering my question?॥19॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd