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mahabharat 3.64.16: हे पृथ्वी के रक्षक! उन उड़ते हुए हंसों ने जो बातें आपसे और मुझसे कहीं, उन पर विचार कीजिए।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.64.16 
यच्चोक्तं विहगैर्हंसै: समीपे तव भूमिप।
मत्समक्षं यदुक्तं च तदवेक्षितुमर्हसि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वी के रक्षक! उन उड़ते हुए हंसों ने जो बातें आपसे और मुझसे कहीं, उन पर विचार कीजिए।॥16॥
 
O protector of the earth! Please think over the things that the flying swans said to you and me. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)