श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  3.64.132 
सार्थवाह उवाच
सार्थोऽयं चेदिराजस्य सुबाहो: सत्यदर्शिन:।
क्षिप्रं जनपदं गन्ता लाभाय मनुजात्मजे॥ १३२॥
 
 
अनुवाद
सार्थवाह बोले - राजकन्या ! हमारा यह दल विशेष लाभ के उद्देश्य से शीघ्र ही सत्यदर्शी चेदिराज सुबाहु के जनपद (नगर) में जाएगा ॥132॥
 
Sarthvaha said – Princess! This group of ours will soon go to the district (city) of Satyadarshi Chediraj Subahu for the purpose of special benefit. 132॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि दमयन्तीसार्थवाहसंगमे चतु:षष्टितमोऽध्याय:॥ ६४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें दमयन्तीकी सार्थवाहसे भेंटविषयक चौंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६४॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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