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mahabharat 3.64.128: 'शुचिस्मिते! मैं इस दल का नेता और संचालक हूँ। यशस्विनी! मैंने इस वन में नल नाम का कोई पुरुष नहीं देखा।' 128.   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.64.128 
अहं सार्थस्य नेता वै सार्थवाह: शुचिस्मिते।
मनुष्यं नलनामानं न पश्यामि यशस्विनि॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
'शुचिस्मिते! मैं इस दल का नेता और संचालक हूँ। यशस्विनी! मैंने इस वन में नल नाम का कोई पुरुष नहीं देखा।' 128.
 
‘Shuchismite! I am the leader and director of this group. Yashaswini! I have not seen any person named Nala in this forest. 128.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)