Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.64.120-121: 'क्या आप यक्षी हैं, राक्षसी हैं या कोई महान देवी हैं? अनिन्दिते! हमारा पूर्ण कल्याण और रक्षा कीजिए। कल्याणी! हमारा यह समूह शीघ्र और सकुशल यहाँ से चला जाए और हम सब प्रकार से धन्य हों।' 120-121॥ | mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यक्षी वा राक्षसी वा त्वमुताहोऽसि वराङ्गना।
सर्वथा कुरु न: स्वस्ति रक्ष वास्माननिन्दिते॥ १२०॥
यथायं सर्वथा सार्थ: क्षेमी शीघ्रमितो व्रजेत्।
तथा विधत्स्व कल्याणि यथा श्रेयो हि नो भवेत्॥ १२१॥
अनुवाद
'क्या आप यक्षी हैं, राक्षसी हैं या कोई महान देवी हैं? अनिन्दिते! हमारा पूर्ण कल्याण और रक्षा कीजिए। कल्याणी! हमारा यह समूह शीघ्र और सकुशल यहाँ से चला जाए और हम सब प्रकार से धन्य हों।' 120-121॥
'Are you a Yakshi or a demon or some great goddess? Anindite! Provide us complete welfare and protection. Kalyani! May this group of ours leave from here quickly and safely and may we be blessed in every way.' 120-121॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥