Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.64.115: उसकी सूरत पागल औरत जैसी थी, वह दुःखी, कमज़ोर, उदास और पीली पड़ गई थी। उसने अपने आधे शरीर को कपड़ों से ढक रखा था और उसके बालों पर धूल जमी हुई थी। 115. | mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्मत्तरूपा शोकार्ता तथा वस्त्रार्धसंवृता।
कृशा विवर्णा मलिना पांसुध्वस्तशिरोरुहा॥ ११५॥
अनुवाद
उसकी सूरत पागल औरत जैसी थी, वह दुःखी, कमज़ोर, उदास और पीली पड़ गई थी। उसने अपने आधे शरीर को कपड़ों से ढक रखा था और उसके बालों पर धूल जमी हुई थी। 115.
Her appearance resembled that of a mad woman, she was grief-stricken, weak, sad and pale. She had covered her body with half her clothes and dust had settled on her hair. 115.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥