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mahabharat 3.64.106: 'उसने साड़ी के आधे टुकड़े से अपना शरीर ढक रखा है, उसके शरीर की त्वचा अत्यंत कोमल है। वीर नल महान विपत्ति सहकर इस वन में आये हैं ॥106॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  3.64.106 
एकवस्त्रार्धसंवीतं सुकुमारतनुत्वचम्।
व्यसनेनार्दितं वीरमरण्यमिदमागतम्॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
'उसने साड़ी के आधे टुकड़े से अपना शरीर ढक रखा है, उसके शरीर की त्वचा अत्यंत कोमल है। वीर नल महान विपत्ति सहकर इस वन में आये हैं ॥106॥
 
'He has covered his body with half a piece of sari, the skin of his body is very delicate. The brave Nala has come to this forest after suffering a great calamity.॥ 106॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)