Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.64.104-105: (अब उन्होंने अशोक से कहा-) 'प्रियदर्शन अशोक! आप शीघ्र ही मेरा शोक दूर करें। क्या आपने शत्रुओं का नाश करने वाले, शोक, भय और विघ्नों से रहित राजा नल को देखा है? क्या आपने मेरे प्रिय, दमयन्ती के प्रिय, निषादों के राजा नल को देखा है?॥104-105॥ | mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(अब उन्होंने अशोक से कहा-) 'प्रियदर्शन अशोक! आप शीघ्र ही मेरा शोक दूर करें। क्या आपने शत्रुओं का नाश करने वाले, शोक, भय और विघ्नों से रहित राजा नल को देखा है? क्या आपने मेरे प्रिय, दमयन्ती के प्रिय, निषादों के राजा नल को देखा है?॥104-105॥
(Now he said to Ashoka-) 'Priyadarshan Ashoka! You remove my grief soon. Have you seen King Nala, the destroyer of enemies, who is free from grief, fear and obstacles? Have you seen my beloved, Damayanti's beloved, the king of Nishadhans Nala?॥104-105॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥