Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.64.103: (उसे देखकर वह मन ही मन कहने लगी-) 'अहा! इस वन में यह अशोक वृक्ष बड़ा सुन्दर है। यह नाना प्रकार के फल, पुष्प आदि से सुशोभित होकर सुन्दर गिरिराज के समान शोभा पा रहा है।'॥103॥ | mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(उसे देखकर वह मन ही मन कहने लगी-) 'अहा! इस वन में यह अशोक वृक्ष बड़ा सुन्दर है। यह नाना प्रकार के फल, पुष्प आदि से सुशोभित होकर सुन्दर गिरिराज के समान शोभा पा रहा है।'॥103॥
(Seeing it she started saying to herself-) 'Oh! This Ashoka tree in this forest is very beautiful. It is looking beautiful like the beautiful Giriraj, adorned with many kinds of fruits, flowers etc.'॥ 103॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥