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mahabharat 3.64.100: भीमपुत्री दमयन्ती ने पवित्र मुस्कान के साथ बहुत देर तक इन सब बातों पर विचार किया, तत्पश्चात् वह दुःखी और उदास हो गई, तथा उसका मुखमंडल उदासी से ढक गया॥100॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  3.64.100 
ध्यात्वा चिरं भीमसुता दमयन्ती शुचिस्मिता।
भर्तृशोकपरा दीना विवर्णवदनाभवत्॥ १००॥
 
 
अनुवाद
भीमपुत्री दमयन्ती ने पवित्र मुस्कान के साथ बहुत देर तक इन सब बातों पर विचार किया, तत्पश्चात् वह दुःखी और उदास हो गई, तथा उसका मुखमंडल उदासी से ढक गया॥100॥
 
Damayanti, daughter of Bhima, with a pure smile, thought over all these things for a long time. After that she became sad and depressed, and her face became covered with gloom.॥100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)