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mahabharat 3.64.1: महर्षि बृहदश्व ने कहा: शिकारी को मारकर कमल-नेत्रों वाली राजकुमारी अपनी दरारों की झनकार से गूंजती हुई, निर्जन और भयानक वन में आगे बढ़ी।   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.64.1 
बृहदश्व उवाच
सा निहत्य मृगव्याधं प्रतस्थे कमलेक्षणा।
वनं प्रतिभयं शून्यं झिल्लिकागणनादितम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व ने कहा: शिकारी को मारकर कमल-नेत्रों वाली राजकुमारी अपनी दरारों की झनकार से गूंजती हुई, निर्जन और भयानक वन में आगे बढ़ी।
 
Sage Brihadashwa said: After killing the hunter, the lotus-eyed princess proceeded further into the lonely and dreadful forest, resounding with the tinkling of her slits.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)