Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.63.9: 'राजन्! हे निषधनराज! आप प्रत्यक्ष हैं, प्रत्यक्ष हैं, प्रत्यक्ष हैं। आप लताओं के पीछे छिपकर मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे हैं?॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.63.9 
दृश्यसे दृश्यसे राजन्नेष दृष्टोऽसि नैषध।
आवार्य गुल्मैरात्मानं किं मां न प्रतिभाषसे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! हे निषधनराज! आप प्रत्यक्ष हैं, प्रत्यक्ष हैं, प्रत्यक्ष हैं। आप लताओं के पीछे छिपकर मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे हैं?॥9॥
 
‘King! O King of Nishadhan! You are visible, you are visible, you are visible. Why are you not talking to me, hiding yourself behind the creepers?॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)