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mahabharat 3.63.7: हे पुण्यात्मा! मनुष्य अकाल मृत्यु को प्राप्त नहीं होते, इसीलिए तुम्हारा प्रियतम तुम्हारे द्वारा त्याग दिए जाने पर भी कुछ क्षणों तक जीवित रहता है।   |   mahabharat अध्याय 3.63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.63.7 
नाकाले विहितो मृत्युर्मर्त्यानां पुरुषर्षभ।
तत्र कान्ता त्वयोत्सृष्टा मुहूर्तमपि जीवति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे पुण्यात्मा! मनुष्य अकाल मृत्यु को प्राप्त नहीं होते, इसीलिए तुम्हारा प्रियतम तुम्हारे द्वारा त्याग दिए जाने पर भी कुछ क्षणों तक जीवित रहता है।
 
'O virtuous man! Human beings do not die untimely, that is why your beloved is still alive for even a few moments after being deserted by you. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)