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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश
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श्लोक 6
श्लोक
3.63.6
शक्यसे ता गिर: सम्यक् कर्तुं मयि नरेश्वर।
यास्तेषां लोकपालानां संनिधौ कथिता: पुरा॥ ६॥
अनुवाद
'नरेश्वर! क्या तुम आज मुझसे वह सब सत्य सिद्ध कर सकोगे जो तुमने स्वयंवर सभा में उन लोकपालों से कहा था?॥6॥
'Nareshwar! Will you be able to prove true to me today whatever you had said to those Lokpals in the Swayamvar Sabha earlier?॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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