Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.63.38: यदि मैं निषादराज नल के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष का विचार भी न करूँ, तो उसके प्रभाव से यह तुच्छ शिकारी प्राणहीन होकर गिर पड़ेगा ॥ 38॥ | mahabharat अध्याय 3.63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यद्यहं नैषधादन्यं मनसापि न चिन्तये।
तथायं पततां क्षुद्रो परासुर्मृगजीवन:॥ ३८॥
अनुवाद
यदि मैं निषादराज नल के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष का विचार भी न करूँ, तो उसके प्रभाव से यह तुच्छ शिकारी प्राणहीन होकर गिर पड़ेगा ॥ 38॥
"If I do not even think of any other person other than Nala, the king of Nishadhas, then due to its effect this insignificant hunter will fall down lifeless." ॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥