श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.63.38 
यद्यहं नैषधादन्यं मनसापि न चिन्तये।
तथायं पततां क्षुद्रो परासुर्मृगजीवन:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं निषादराज नल के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष का विचार भी न करूँ, तो उसके प्रभाव से यह तुच्छ शिकारी प्राणहीन होकर गिर पड़ेगा ॥ 38॥
 
"If I do not even think of any other person other than Nala, the king of Nishadhas, then due to its effect this insignificant hunter will fall down lifeless." ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)