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mahabharat 3.63.37: पति और राज्य दोनों से वंचित होकर दमयन्ती अत्यंत दुःखी हुई। इधर उसे ऐसा प्रतीत नहीं हुआ कि शिकारी की दुष्ट नीयत उसके वचनों से रुक सकती है। तब (उस शिकारी पर अत्यंत क्रोधित होकर) उसने उसे शाप दे दिया-॥37॥   |   mahabharat अध्याय 3.63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.63.37 
दमयन्ती तु दु:खार्ता पतिराज्यविनाकृता।
अतीतवाक्पथे काले शशापैनं रुषान्विता॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
पति और राज्य दोनों से वंचित होकर दमयन्ती अत्यंत दुःखी हुई। इधर उसे ऐसा प्रतीत नहीं हुआ कि शिकारी की दुष्ट नीयत उसके वचनों से रुक सकती है। तब (उस शिकारी पर अत्यंत क्रोधित होकर) उसने उसे शाप दे दिया-॥37॥
 
Being deprived of both husband and kingdom, Damayanti was extremely distressed. Here it did not seem that the hunter's evil intentions could be stopped by her words. Then (becoming very angry with that hunter) she cursed him -॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)