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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश
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श्लोक 31
श्लोक
3.63.31
दमयन्ती तथा तेन पृच्छॺमाना विशाम्पते।
सर्वमेतद् यथावृत्तमाचचक्षेऽस्य भारत॥ ३१॥
अनुवाद
हे भरतवंशी राजा युधिष्ठिर! व्याध के पूछने पर दमयन्ती ने उसे सारा वृत्तान्त यथावत् सुना दिया॥31॥
Bharatvanshi king Yudhishthir! When asked by the hunter, Damayanti told him the entire story accurately. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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