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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश
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श्लोक 30
श्लोक
3.63.30
कस्य त्वं मृगशावाक्षि कथं चाभ्यागता वनम्।
कथं चेदं महत् कृच्छ्रं प्राप्तवत्यसि भाविनि॥ ३०॥
अनुवाद
'मृगलोचने! तुम किसकी पत्नी हो और इस वन में कैसे आईं? भामिनी! तुम्हें यह महान दुःख कैसे सहना पड़ा?'॥30॥
'Mrigalochne! Whose wife are you and how did you come to the forest? Bhaamini! How have you had to undergo this great suffering?'॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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