vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश
»
श्लोक 3
श्लोक
3.63.3
हा नाथ हा महाराज हा स्वामिन् किं जहासि माम्।
हा हतास्मि विनष्टास्मि भीतास्मि विजने वने॥ ३॥
अनुवाद
'हे प्रभु! हे राजन! हे प्रभु! आप मुझे क्यों त्याग रहे हैं? हाय! मैं मारा गया, नष्ट हो गया; इस निर्जन वन में मुझे बहुत भय लग रहा है।
'Oh Lord! Oh King! Oh Lord! Why are you abandoning me? Alas! I am killed, destroyed; I am feeling very afraid in this deserted forest.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×