Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.63.24: 'निषधननरेश! यदि मैं मर जाऊँ, तो बार-बार मेरा स्मरण करते रहने से आपकी क्या दशा होगी? प्रभु! आज आप मुझे वन में छोड़कर क्यों चले गए?॥24॥ | mahabharat अध्याय 3.63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं भविष्यसि पुनर्मामनुस्मृत्य नैषध।
कथं भवाञ्जगामाद्य मामुत्सृज्य वने प्रभो॥ २४॥
अनुवाद
'निषधननरेश! यदि मैं मर जाऊँ, तो बार-बार मेरा स्मरण करते रहने से आपकी क्या दशा होगी? प्रभु! आज आप मुझे वन में छोड़कर क्यों चले गए?॥24॥
‘Nishadhanaresh! If I die, what will be your condition if you keep remembering me again and again? Prabhu! Why did you leave me in the forest today and go away?॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥