हा नाथ मामिह वने ग्रस्यमानामनाथवत्।
ग्राहेणानेन विजने किमर्थं नानुधावसि॥ २३॥
अनुवाद
(वह रोते हुए कहने लगी-) 'हे प्रभु! इस निर्जन वन में यह अजगर सर्प मुझे अनाथ की भाँति खा रहा है। आप दौड़कर मुझे क्यों नहीं बचाते?॥ 23॥
(She started crying and said-) 'Oh Lord! In this deserted forest this python snake is devouring me like an orphan. Why don't you come running to save me?॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)