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सा ग्रस्यमाना ग्राहेण शोकेन च परिप्लुता।
नात्मानं शोचति तथा यथा शोचति नैषधम्॥ २२॥
अनुवाद
यद्यपि अजगर शोक में डूबी हुई वैदर्भी को निगल रहा था, फिर भी वह अपने लिए उतना शोक नहीं कर रही थी, जितना निषधन के राजा नल के लिए कर रही थी।
Even though the python was swallowing Vaidarbhi who was drowned in grief, she was not grieving for herself as much as she was grieving for Nala, the king of Nishadhan.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥