श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  3.63.20-21 
तां क्रन्दमानामत्यर्थं कुररीमिव वाशतीम्।
करुणं बहु शोचन्तीं विलपन्तीं मुहुर्मुहु:॥ २०॥
सहसाभ्यागतां भैमीमभ्याशपरिवर्तिनीम्।
जग्राहाजगरो ग्राहो महाकाय: क्षुधान्वित:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वह कुररी पक्षी की तरह ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी और बार-बार अत्यंत दुःख से विलाप कर रही थी। वहाँ से कुछ ही दूरी पर एक विशाल भूखा अजगर बैठा था। बार-बार चक्कर लगाते हुए, वह अचानक पास आई भीम की पुत्री दमयंती को (पैरों से) निगलने लगा।
 
She was crying loudly like a Kurri bird and was wailing again and again in extreme grief. A huge hungry python was sitting not far from there. Circling again and again, it started swallowing Bhima's daughter Damayanti (from the feet) who had suddenly come near.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)