श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  3.63.18-19 
एवं तु विलपन्ती सा राज्ञो भार्या महात्मन:।
अन्वेषमाणा भर्तारं वने श्वापदसेविते॥ १८॥
उन्मत्तवद् भीमसुता विलपन्ती इतस्तत:।
हा हा राजन्निति मुहुरितश्चेतश्च धावति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विलाप करती हुई तथा भयंकर पशुओं से भरे हुए वन में अपने पति को ढूंढती हुई महाहृदयी राजा नल की पत्नी भीमसेन की पुत्री दमयन्ती उन्मत्त होकर रोती-चिल्लाती हुई इधर-उधर दौड़ने लगी और बार-बार यह कहने लगी, "हे राजन! हे प्रभु!"
 
Lamenting in this manner and looking for her husband in the forest infested with ferocious animals, Bhima's daughter Damayanti, the wife of the great-hearted King Nala, became mad, weeping and wailing and started running here and there, repeatedly saying, "Oh, my King! Oh, my Lord!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)