श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.63.17 
अपापचेतसं पापो य एवं कृतवान्नलम्।
तस्माद् दु:खतरं प्राप्य जीवत्वसुखजीविकाम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'जिस पापी ने धर्मात्मा राजा नल को इस अवस्था में पहुँचाया है, उसे उससे भी अधिक दुःख भोगना पड़ेगा और दुःखमय जीवन जीना पड़ेगा।'॥17॥
 
'The sinner who has brought the pious King Nala to this state will have to suffer even more than him and will have to live a life of misery.'॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)