श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.63.15 
अतीव शोकसंतप्ता मुहुर्नि:श्वस्य विह्वला।
उवाच भैमी नि:श्वस्य रुदत्यथ पतिव्रता॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अत्यन्त दुःखी होकर व्याकुल एवं पतिव्रता दमयन्ती बार-बार गहरी साँसें लेती हुई, लम्बी साँस लेते हुए रोती हुई बोली-॥15॥
 
Being extremely grief-stricken, the distraught and faithful Damayanti, taking deep breaths again and again, said while crying while taking a long sigh -॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)