श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.63.14 
मुहुरुत्पतते बाला मुहु: पतति विह्वला।
मुहुरालीयते भीता मुहु: क्रोशति रोदिति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
दमयन्ती बार-बार मचलकर उठती और गिर पड़ती, कभी डर के मारे छिप जाती और कभी जोर-जोर से रोने और चिल्लाने लगती॥14॥
 
Damayanti would get up again and again and fall down in a state of agitation. Sometimes she would hide in fear and sometimes she would start crying and screaming loudly.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)