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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश
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श्लोक 13
श्लोक
3.63.13
तत: सा तीव्रशोकार्ता प्रदीप्तेव च मन्युना।
इतश्चेतश्च रुदती पर्यधावत दु:खिता॥ १३॥
अनुवाद
तदनन्तर दमयन्ती दुःख से आक्रांत और क्रोध से जलती हुई अत्यन्त दुःखी हो गई और रोने-धोने तथा इधर-उधर दौड़ने लगी॥13॥
Thereafter, Damayanti, overcome with grief and burning with anger, became very sad and started crying and running here and there. 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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