Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.62.9: राज्य के हरण, मित्रों के त्याग तथा वन में मिलने वाले नाना प्रकार के कष्टों का विचार करके वह चिन्तित हो गया।   |   mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.62.9 
स तद् राज्यापहरणं सुहृत्त्यागं च सर्वश:।
वने च तं परिध्वंसं प्रेक्ष्य चिन्तामुपेयिवान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
राज्य के हरण, मित्रों के त्याग तथा वन में मिलने वाले नाना प्रकार के कष्टों का विचार करके वह चिन्तित हो गया।
 
Thinking about the abduction of the kingdom, the abandonment of friends and the various kinds of sufferings he faced in the forest, he became worried.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)