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mahabharat 3.62.8: हे राजन! राजा नल का मन शोक से व्याकुल हो रहा था। दमयन्ती के सो जाने पर भी उन्हें पहले जैसी नींद नहीं आ रही थी।   |   mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.62.8 
सुप्तायां दमयन्त्यां तु नलो राजा विशाम्पते।
शोकोन्मथितचित्तात्मा न स्म शेते तथा पुरा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! राजा नल का मन शोक से व्याकुल हो रहा था। दमयन्ती के सो जाने पर भी उन्हें पहले जैसी नींद नहीं आ रही थी।
 
O King! King Nala's mind was churned with grief. Even after Damayanti fell asleep, he himself could not sleep as before. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)