Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.62.29: कलियुग के स्पर्श से उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी; इसलिए वह अत्यन्त दुःखी होकर अपनी पत्नी को उस निर्जन वन में अकेला छोड़कर नाना प्रकार की बातें सोचता हुआ चला गया। | mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कलियुग के स्पर्श से उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी; इसलिए वह अत्यन्त दुःखी होकर अपनी पत्नी को उस निर्जन वन में अकेला छोड़कर नाना प्रकार की बातें सोचता हुआ चला गया।
His intellect had become corrupted by the touch of Kaliyuga; therefore, being very sad, he left his wife alone in that desolate forest, thinking about various things.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि दमयन्तीपरित्यागे द्विषष्टितमोऽध्याय:॥ ६२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें दमयन्तीपरित्यागविषयक बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥