Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.62.27: उस समय दुःखी राजा नल का हृदय दुविधा में पड़ा हुआ प्रतीत हो रहा था। जैसे झूला बार-बार ऊपर-नीचे होता रहता है, उसी प्रकार उनका हृदय कभी बाहर जाता और कभी सभाभवन में लौट आता था॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय दुःखी राजा नल का हृदय दुविधा में पड़ा हुआ प्रतीत हो रहा था। जैसे झूला बार-बार ऊपर-नीचे होता रहता है, उसी प्रकार उनका हृदय कभी बाहर जाता और कभी सभाभवन में लौट आता था॥ 27॥
At that time, the heart of the sad King Nala seemed to be in a dilemma. Just like a swing keeps going up and down again and again, in the same way his heart sometimes went out and sometimes returned to the assembly hall.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥