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mahabharat 3.62.26: एक ओर तो राजा नल कलियुग की ओर खिंचे जा रहे थे और दूसरी ओर दमयन्ती का प्रेम उन्हें खींच रहा था, इसलिए वे बार-बार वहाँ जाते और उस आश्रम में लौट आते थे॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.62.26 
गत्वा गत्वा नलो राजा पुनरेति सभां मुहु:।
आकृष्यमाण: कलिना सौहृदेनावकृष्यते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
एक ओर तो राजा नल कलियुग की ओर खिंचे जा रहे थे और दूसरी ओर दमयन्ती का प्रेम उन्हें खींच रहा था, इसलिए वे बार-बार वहाँ जाते और उस आश्रम में लौट आते थे॥ 26॥
 
On one side, King Nala was being pulled by Kali Yuga and on the other side, he was being pulled by Damayanti's love. Therefore, he used to go there again and again and return to that hermitage.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)