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mahabharat 3.62.25: इस पृथ्वी पर अपनी अद्वितीय सुन्दरी प्रिय पत्नी दमयन्ती से ऐसा कहकर राजा नल उठकर चले गए। उस समय कलिन ने उनकी विवेक-बुद्धि हर ली थी॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.62.25 
एवमुक्त्वा प्रियां भार्यां रूपेणाप्रतिमां भुवि।
कलिनापहृतज्ञानो नल: प्रातिष्ठदुद्यत:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर अपनी अद्वितीय सुन्दरी प्रिय पत्नी दमयन्ती से ऐसा कहकर राजा नल उठकर चले गए। उस समय कलिन ने उनकी विवेक-बुद्धि हर ली थी॥ 25॥
 
Having said this to his beloved wife Damayanti, who had no equal in beauty on this earth, King Nala got up and left. At that time Kalina had taken away his sense of prudence.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)