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mahabharat 3.62.20: कुछ दूर जाकर उनका हृदय परिवर्तित हो गया और वे उसी सभाभवन में लौट आए। वहाँ दमयन्ती को देखकर निषादों के राजा नल जोर-जोर से रोने लगे।   |   mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.62.20 
ततो निवृत्तहृदय: पुनरागम्य तां सभाम्।
दमयन्तीं तदा दृष्ट्वा रुरोद निषधाधिप:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
कुछ दूर जाकर उनका हृदय परिवर्तित हो गया और वे उसी सभाभवन में लौट आए। वहाँ दमयन्ती को देखकर निषादों के राजा नल जोर-जोर से रोने लगे।
 
After going some distance, his heart changed and he returned to the same assembly hall. There, on seeing Damayanti, Nala, the king of Nishadhans, began to cry profusely.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)