Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.62.2: मैं पहले एक समृद्ध राजा था। उस अवस्था में मैंने वहाँ जाकर तुम्हारा सुख बढ़ाया था और आज उस राज्य से वंचित होकर मैं तुम्हारा दुःख ही बढ़ा रहा हूँ। ऐसी अवस्था में मैं वहाँ कैसे जा सकता हूँ?॥2॥ | mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं समृद्धो गत्वाहं तव हर्षविवर्धन:।
परिच्युतो गमिष्यामि तव शोकविवर्धन:॥ २॥
अनुवाद
मैं पहले एक समृद्ध राजा था। उस अवस्था में मैंने वहाँ जाकर तुम्हारा सुख बढ़ाया था और आज उस राज्य से वंचित होकर मैं तुम्हारा दुःख ही बढ़ा रहा हूँ। ऐसी अवस्था में मैं वहाँ कैसे जा सकता हूँ?॥2॥
I was once a prosperous king. In that condition, I had gone there and increased your happiness and today, being deprived of that kingdom, I am only increasing your sorrow. How can I go there in such a condition?॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥