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mahabharat 3.62.17: फिर यह सोचकर कि, ‘मैं वस्त्र किस प्रकार काटूँ कि मेरी प्रियतमा नींद से न जाग जाए?’ राजा नल धर्मशाला में (नग्न) घूमने लगे॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.62.17 
कथं वासो विकर्तेयं न च बुध्येत मे प्रिया।
विचिन्त्यैवं नलो राजा सभां पर्यचरत्तदा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
फिर यह सोचकर कि, ‘मैं वस्त्र किस प्रकार काटूँ कि मेरी प्रियतमा नींद से न जाग जाए?’ राजा नल धर्मशाला में (नग्न) घूमने लगे॥17॥
 
Then thinking, 'How should I cut the cloth so that my beloved does not wake up from her sleep?' King Nala started roaming around in the Dharamshala (naked).॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)