Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.62.15: ऐसा सोचकर उसका मन दमयन्ती को अपने पास रखने का विचार छोड़कर, कलियुग के दुष्ट स्वभाव के वशीभूत होकर दमयन्ती को त्यागने की ओर प्रवृत्त हो गया॥15॥ | mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं तस्य तदा बुद्धिर्दमयन्त्यां न्यवर्तत।
कलिना दुष्टभावेन दमयन्त्या विसर्जने॥ १५॥
अनुवाद
ऐसा सोचकर उसका मन दमयन्ती को अपने पास रखने का विचार छोड़कर, कलियुग के दुष्ट स्वभाव के वशीभूत होकर दमयन्ती को त्यागने की ओर प्रवृत्त हो गया॥15॥
Thinking thus, his mind withdrew from the thought of keeping Damayanti with him. Rather, being influenced by the evil nature of Kaliyuga, his mind was inclined towards abandoning Damayanti.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥