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mahabharat 3.62.14: 'यह महाभागा यशस्विनी दमयन्ती मेरी भक्त और पतिव्रता है। इसकी भक्ति और तेज के कारण मार्ग में कोई भी इसका सतीत्व नष्ट नहीं कर सकता। 14॥   |   mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.62.14 
न चैषा तेजसा शक्या कैश्चिद् धर्षयितुं पथि।
यशस्विनी महाभागा मद्भक्तेयं पतिव्रता॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'यह महाभागा यशस्विनी दमयन्ती मेरी भक्त और पतिव्रता है। इसकी भक्ति और तेज के कारण मार्ग में कोई भी इसका सतीत्व नष्ट नहीं कर सकता। 14॥
 
'This Mahabhaga Yashaswini Damayanti is my devotee and devoted husband. Due to his devotion and sharpness, no one can destroy his chastity on the way. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)